काजू के लिए समेकित कीट प्रबन्धन काजू अपने देश के अंर्तराष्ट्रीय व्यापार हेतु महत्वपूर्ण फसल है। काजू के गुठली (करनेल) के निर्यात से काफी मात्रा में विदेशी विनियम की संभावना बनती है। काजू की सफल खेती मुख्यतः वहां की वातावरणीय परिस्थिति, अच्छे प्रभेद का चयन एवं अनुशंसित कृषि प्रणाली को अपनाने पर निर्भर करती है। केरल राज्य में लगभग 46,000 मेट्रिक टन का उत्पादन होता है जो देश के जुल उत्पादन का 16% है। यह उत्पादन 86,300 हेक्टेयर क्षेत्र में होता है, जिससे औसत उपज 537 किलोग्राम/प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है। मुख्य क्षतिकारक क्षतिकारक कीट चाय-मच्छर (हेलोपेलटीस ऐनटोनी) धड़ छेदक (प्लोकोईडेरस फेरुजिनिथिस) पत्ती माईनर (एक्रोसरकोप्स सिंग्रामा) तना एवं पुष्प मकड़ी (मकाला मोनकुसालीस) काले कीट बीमारियाँ/रोग डाईबैक (क्लैक्टोट्राईकम ग्लोइ ओसपोटिड्स) लीफ स्पॉट (फोरिपसिस एनार्काडिक कीट अनुश्रवण कीट अनुश्रवण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में कीट एवं व्याधि के प्रारंभिक विकास का सर्वेक्षण करना है। कृषि प्रसार कर्मियों/कृषकों द्वारा 15 दिनों के अंतराल पर क्षेत्र का भ्रमण करना चाहिए एवं कीट तथा व्याधि के आरंभिक प्रकोप का पता लगाना चाहिए तथा अन्य कृषकों को भी इस कार्य हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए। क्षेत्र परिभ्रमण के आधार पर पौधा संरक्षण उपाय तभी अपनाना चाहिए जब कीट/व्याधि द्वारा बर्बादी इ० टी० एल० पार कर जाता है। शीघ्र भ्रमण सर्वेक्षण (आर आर एस) फसल मौसम के प्रारंभ में सर्वप्रथम कीट एवं व्याधि से प्रभावित सर्वेक्षण पथ का चयन शीध्र भ्रमण सर्वेक्षण द्वारा करना चाहिए। इस चयनित पथ पर 5-10 दिनों के अंतराल में 5-10 किलोमीटर पर कीट एवं व्याधि प्रकोप का आकलन करना चाहिए। प्रति हेक्टेयर बेहतरीन ढंग से 12 जगहों पर 5 पौधों में क्षति कारक कीट, व्याधि एवं प्रतिरक्षक की संख्या के आंकड़ों को अंकित कर रखें। क्षेत्रीय भ्रमण आर.आर. एस. के पठनों के आधार पर ग्राम स्तर के कृषकों को क्षेत्र भ्रमण हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए। क्षेत्र-भ्रमण के क्रम में कृषक क्षतिकारक कीट, व्याधि एवं प्रतिरक्षकों की संख्या का अवकलन पर करते रहें। राज्य स्तर पर कृषि विभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों का प्रयोग कर क्षेत्रीय भ्रमण हेतु कृषकों को प्रोत्साहित करते रहना चाहिए तथा उन्हें कीट एवं व्याधि के प्रकोप के नियन्त्रण हेतु सुझाव देते रहना चाहिए। कृषि पारिस्थितिक तंत्र विश्लेषण (आयेसा) आयेसा एक ऐसा उपगमन मार्ग है जिससे प्रसार कार्यकर्त्ता एवं कृषक विशेष क्षेत्र परिस्थिति में स्वस्थ फल-उत्पादन के लिए कीट, रक्षक, मृदा अवस्था, फसल स्वास्थ्य, मौसमी कारकों का उपयोग कर सकते हैं। क्षेत्रीय परिस्थिति में इस प्रकार के विश्लेषण से कीट प्रबन्धन प्रक्रिया में निर्णय लेने हेतु काफी सहायता मिल सकती है। आयेसा के आधारभूत अवयव निम्न प्रकार है – विभिन्न अवस्था पर पौधा का स्वास्थ्य कीट एवं प्रतिरक्षक जनसंख्या का गति विश्लेषण मृदा अवस्था मौसमी कारक कृषक का पूर्व अनुभव समेकित कीट प्रबन्धन रणनीतियां कृषीय प्रक्रिया अधिक उपज, रोग प्रतिरोधी, सहनीय प्रभेद का चयन करें। बुआई सामग्री हेतु मुलायम कलम को ही प्राथमिकता दें। कम उर्वरा वाली मिट्टी के लिए 7.5x7.5 मीटर, अधिक उर्वरा एवं गहरी मिट्टी के लिए 10 x10 मीटर एवं ढालू जमीन के लिए 10-5 x6-8 मीटर बुआई दुरी रखें। 4-6 महीना पुराना उचित प्रभेद का कलम चयनित करें। पौधा-रोपण हेतु 60x60x60 से. ,मी. से कम गड्ढे की प्राथमिकता न दें। मानसून के प्रारंभ में ही पौधों की बुआई करें। पौधा लगाने के समय ग्राफ्ट से पॉलिथीन टेप को हटा दें। नये पौधों में मल्चिंग तथा स्तेकिंग की व्यवस्था करें। अनुशंसित दर पर ही खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करें। पौधों के प्रारंभिक काल में समुचित सिंचाई की व्यवस्था करें। खरपतवार की सफाई जून-जुलाई या अगस्त-सितम्बर माह में रसायनिक खरपतवार नाशक या यांत्रिक विधि को काट दें। रूट-स्टॉक से निकलने वाली डालियों को काट दें। जमीन से एक मीटर की ऊंचाई तक पौधे को काटकर या ट्रेन कर सीधा विकसित होने दें। दो वर्ष के पूर्व ही खाली जमीन में गैप फिलिंग करना श्रेयकर होता है। 5-20 वर्षीय कम फल देनेवाले पेड़ों को टॉप ड्रेसिंग कर उसका जीर्णोद्धार कर दें। मई-सितम्बर माह में डालियों को आरी काटकर कटे भाग में बलाईटॉक्स/सेविन 50% डब्ल्यूपी से पेंट कर दें। काजू का बीज नट पूरी तरह तैयार होने पर ही संग्रहित करें। यांत्रिक प्रक्रिया पौधा के कीट/व्याधि से प्रभावित बर्बाद भाग को रेती से रगड़ का साफ कर दें। 5% नीम तेल मिश्रण (50 मिली० नीम तेल+1 लीटर पानी+5 मिली० टिपोल या 5 ग्राम साबुन) से धड़छेदक के नियंत्रण हेतु पेड़ के 1 मीटर उंचाई तक अप्रैल-मई और अक्तूबर-नवम्बर में पेंट कर दें। पौधा रोपण क्षेत्र की सफाई के लिए बर्बाद, मृत, सुखा भाग को निकालकर नष्ट कर दें। जैविक नियन्त्रण एनेक्चर -1 में दर्शाये गये प्राकृतिक शत्रु को संरक्षित कर रखें। धड़ छेदक के नियंत्रण हेतु हरी मसकार्डिन फंजाई मेटारहिजियम एनिसीपली या बियोभेरिया बैसियाना का प्रयोग करें। अंडा परजीवी टेलिनोम या क्रेमैटोगास्टर को धीरे-धीरे प्रयोग में लायें। रासायनिक नियंत्रण चाय-मच्छर के नियंत्रण हेतु इंडोसल्फान 0.05%, कार्बारिल 0.1%, क्वीनलफॉस 0.05% या फास्फामिडॉन 0.03% का छिड़काव करें। कीटनाशक का चक्रीय प्रयोग कीड़ों में क्षेत्रीय प्रतिरोधता के विअक्स के विरुद्ध कार्य करने में सहायक होता है। धड़ छेदक के नियंत्रण हेतु उनके द्वारा निर्मित जीवित नये छेद की पहचान कर उसे 0.02% कार्बारिल घोल या 75 सेविडोल (4 ग्राम प्रति पेड़) पेड़ के आधार के पास की मिट्टी में मिला दें। अगर लीफ स्पॉट बीमारी का प्रकोप अत्यधिक होता हो तो इसके नियंत्रण हेतु बोर्डेक्स मिश्रण (1%) के घोल का छिड़काव करें। गुलाबी बिमारी या डाई बैक के नियंत्रण हेतु क्षति ग्रस्त भाग को छेनी से साफ कर दें तथा बोर्डेक्स पेस्ट लगा दें। बोर्डक्स मिश्रण 1% का छिड़काव मई-जून एवं अक्तूबर में करें। चाय-मच्छर एवं डाई बैक के नियंत्रण हेतु कीटनाशक प्रयोग की अनुशंसित तालिका प्रथम छिड़काव अक्तूबर-नवम्बर क्वीनालफॉस (25 EC) 2 एम.एल.+कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम-1 लीटर वनस्पतिक विकास अवस्था द्वितीय छिड़काव दिसम्बर-जनवरी पानी में इंडोसल्फान 35 इंसी 1.5 मिली० + मनकोजेब 2 ग्राम-1 लीटर पानी में पैनिकल निकलने के समय तृतीय छिड़काव जनवरी-फरवरी कार्बारिल (50% डब्ल्यू पी०) २ ग्राम 1 लीटर पानी में पुष्प अवस्था के पश्चात फल निकलने के प्रारंभ में। काजू की फसल के लिए चरणबद्ध समेकित कीट प्रबन्धन प्रक्रिया फसल चरण/कीट स० की० प्र० अवयव समेकित कीट प्रबन्धन प्रक्रिया बाई के पूर्व कृषीय प्रक्रिया फसल तैयार होने की चरम अवधि में बीज-गुठली (सीडनट) को इकट्ठा का धुप में 2-3 दिनों तक पूरी तरह सुखायें। मध्यम आकार के (7-9 ग्राम को चयनित कर तेजी से बढ़ने वाले नया पौधा तैयार करने हेतु संग्रहित करें। बुआई के पूर्व बीजनट को रात भर पानी में भींगो कर रखना चाहिए। पौटिंग मिश्रण से भरे हुए पॉलीथीन थैले में ही बीज की बुआई करें। अंकुरण के 40-45 दिन पश्चात पौधा ग्राफ्टिंग करने लायक हो जाता है। रूट-स्टॉक का चयन कृषीय प्रक्रिया डाली रहित मुख्य तना से40-45 दिन पुराने बिचड़ा का चयन करें। कलम का चयन कृषीय प्रक्रिया आवश्यकतानुसार कलम की संख्या प्राप्त करने हेतु मातृ-पौधा के रूप में अधिक उपज देने वाले स्वस्थ पेड़ का चयन करें। अच्छी प्रकार से चुने गये मुख्य तना से ही कलम का चयन करें यह कलम पांच छः महीने में रोपने के लिए तैयार हो जाता है। पौधशाला यांत्रिक प्रक्रिया जल्दी-जल्दी अंतराल और रूट स्टॉक में ये नये पत्तियों को हटा दें। कलम को हमेशा एक जगह से दूसरी पर स्थानांतरित करते रहें, जिससे जड़ का सतही मिट्टी में प्रवेश करने की संभावना न रहें। लीफ स्पॉट रसायनिक प्रक्रिया रसायनिक प्रक्रिया चूसने वाले कीड़ों का नियंत्रण हेतु बार-बार कीटनाशक का प्रयोग करें। अगर रोग का आक्रमण प्रचंड हो तो बोर्डेक्स मिश्रण (1%) का छिड़काव करें। वनस्पति विकास अवस्था (सितम्बर-अक्तूबर) कृषीय प्रक्रिया खरपतवार को नष्ट कर दें। उर्वरक की अनुशंसित मात्रा का प्रयोग करें। चाय-मच्छर रसायनिक प्रक्रिया छोटे पौधे पर क्वीनॉलफास 25 ईसी 10 मिली०+5 लीटर पानी/फास्फोमिडॉन 86 ईसी० 3 मिली०+5 लीटर पानी का छिड़काव करें। बड़े पौधों के लिए क्वीनॉलफास 25 ईसी 20 मिलि० +10 लीटर पानी/फास्फोमिडॉन 6 मिली०+10 लीटर पानी का जरूरत के अनुसार छिड़काव करें। पूरे वर्ष में मात्र तीन छिड़काव करें। एक ही प्रकार के कीटनाशक का प्रयोग लगातार नहीं करना चाहिए। पुष्प अवस्था (नवम्बर-दिसम्बर) धड़छेदक यांत्रिक/रसायनिक प्रक्रिया धड़छेदक द्वारा बनाये गये छिद्र पहचान करें। बर्बाद भाग को रगड़कर निकाल दें 2% कार्बारिल से सराबोर कर दें, या घोल को पेड़ के जड़ की आधार वाले मिट्टी में मिला दें। 1 मीटर तक पेड़ के मध्य भाग को नीम तेल (50 मिली०-नीम तेल +1ली० पानी +5 मिली० टिपोल/5 ग्राम साबुन) द्वारा पेंट कर दें। जमीन से एक मीइत्र ऊपर तक धड़ को कार्बारिल 0.2% से सराबोर करें प्रोफाइलैक्टिक उपचार कर दें, या साल में दो बार मार्च-अप्रैल तथा नवम्बर दिसम्बर में अलकतरा+किरासन तेल (1:2) घोल को पेड़ के तने पर मिट्टी से 1 मीटर की ऊंचाई तक पेंट कर दें। चाय मच्छर रसायनिक प्रक्रिया ऊपर दर्शाये गये पुष्प अवस्था के उपचार को माह नवम्बर-दिसम्बर में अपनायें। पुष्प अवस्था (जनवरी-फरवरी) कृषीय प्रक्रिया 15 दिन के अन्तराल पर 200 लीटर पानी से प्रति पौधा सिंचाई करें, इस अवस्था में पौधों को सिंचाई की आवश्यकता होती है। चाय मच्छर जैविक उपचार चाय मच्छर के नियंत्रण हेतु अंडा-परजीवी टेलीनोमस या कृमाटोगास्टर का प्रयोग धीरे-धीरे करें। रसायनिक प्रक्रिया छोटे पौधे पर थियोडॉन 35 इसी 16 मिली०/8 लीटर पानी में मिलाकर या कार्बारिल 50 डब्ल्यू पी०-15 ग्राम+5 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। बड़े पौधों पर इंडोसल्फान 35 ईसी० -16 मिली०+10 लीटर पानी में या कार्बारिल 50 डब्ल्यू पी०-30 ग्राम+10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। धड़ छेदक रसायनिक प्रक्रिया पुष्प अवस्था में दर्शाए गये उपचार को माह नवम्बर-दिसम्बर माह में अपनायें। फल निर्माण एवं तोड़ने की अवस्था (मार्च-अप्रैल-मई) कृषीय प्रक्रिया गहरी सिंचाई असरदार होती है। 15 दिनों के अन्तराल पर प्रति वृक्ष 2000 लीटर पानी द्वारा सिंचाई करें। जमीन पर गिरे हुए विकसित नट को इकट्ठा कर अलग संचयित कर लें क्योंकि इनको साथ मिलाने से फसल की (करनेल) गुणवत्ता कम हो जाता है। धड़ छेदक यांत्रिक/जैविक/रसायनिक प्रक्रिया धड़ छेदक के आक्रमण पर गहरी नजर रखें। अगर इनका आक्रमण प्रारंभ हो गया तो नवम्बर-दिसम्बर माह में दर्शाए गये पुष्प अवस्था के उपचार को अपनायें। एम० एनीसोप्ली या बी० बैसियाना का प्रयोग करें। काजू के साथ अंतरफसल प्रणाली पूर्व की अवस्था में काजू के साथ अन्नानास की खेती काफी फायदेमंद होती है। 3- वर्षों 4 तक अंर्तफसल के रूप में टैपियोका, मूंगफली, दलहन इत्यादि सफलतापूर्वक ली जा सकती है। ध्यान रखना चाहिए कि मुख्य फसल अंर्तफसल दोनों में भली प्रकार से उर्वरक का प्रयोग किया जाए। काजू में समेकित खरपतवार प्रबन्धन खरपतवार में प्रभेद एवं विकास तीव्रता को देखते हुए जून-जुलाई तथा अगस्त-सितम्बर में रसायनिक/यांत्रिक प्रक्रिया का करें। जुलाई माह से प्रारंभ करते हुए महीने में तीन बार पाराक्वेट 0.4 किलोग्राम/हेक्टेयर का उपयोग हरेक प्रकार के खरपतवार के नियंत्रण में लाभकारी होता है। पारक्वेट 20% इसी का 2 लीटर/हेक्टेयर प्रयोग करें। पारक्वेट का 4-5 मिलि० प्रति लीटर पानी में मिलाकर 400-500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर प्रयोग करें। जुलाई या अगस्त में एक बार ग्लाईफोसेट 0.8 किग्रा./हेक्टेयर (2 लीटर व्यापारिक घोल) का प्रयोग हरेक प्रकार के खरपतवार पर नियंत्रण रखता है। ग्लाईफोसेट 4-5 मिलि० प्रति लीटर पानी में मिलाकर मिश्रण तैयार करें तथा 400-500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। समेकित कीट प्रबन्धन में करें एवं न करें की विवरणी करें न करें 1 केवल अनुशंसित प्रभेद से ही फसलोत्पादन करें। जो प्रभेद किसी विशेष एग्रोकलाईमेटिक जॉन या कीट प्रकोप के लिए अनुशंसित नहीं है, उस प्रभेद का प्रयोग न करें। 2 कलम (ग्राफ्ट ) का परिवहन सावधानीपूर्वक करें जिससे कलम पर आघात न आवें। कलम से अनावश्यक छेड़छाड़ न करें। 3 मिट्टी परीक्षण के आधार पर अनुशंसित खाद एवं उर्वरक का प्रयोग करें। असंतुलित उर्वरक का उपयोग न करें। 4 पौधों पर कीट/बिमारी/पर्यावरण आदि का समयानुसार लगातार ध्यान रखें। बिना पौधों के गहन अध्ययन के किसी प्रकार के छिड़काव का प्रयोग न करें। 5 संक्रमण लो तीव्रता के अनुसार छिड़काव रणनीति तैयार कर्रे। छिड़काव पर्याक्रमण में करें। आधार पर विशेषतया विकास, पुष्प जल्दी, फल आने आदि अवस्था पर ही करें। प्रति वर्ष अधिक से अधिक समयानुसार 3 बार छिड़काव करें इससे ज्यादा छिड़काव न करें। 6 कीटों में प्रतिरोधी की क्षमता उत्पन्न होने के पूर्व ही कीटनाशक का चक्रीय उपुओप्ग (रोटेशन) प्रारंभ कर दें। लगातार वर्षों में एक ही कीटनाशक का प्रयोग न करें। 7 केवल अनुशंसित कीटनाशक का ही प्रयोग करें। अनुशंसित नहीं किए गये किसी प्रकार के कीटनाशक मिश्रण का प्रयोग न करें। 8 केवल अनुशंसित खरपतवार नाशक का प्रयोग निर्धारित दर से ही करें। खरपतवार का नियंत्रण मजदूरों या यांत्रिक विधियों से करें। खरपतवार नाशक का उपयोग सिंचाई-जल या मिट्टी में मिलाकर, बालू या यूरिया के साथ मिलाकर न करें। 9 पूर्ण विकसित नट जो जमीन पर गिर गये हैं उसे इकट्ठा कर लें अविकसित नट को जमा न करें क्योंकि इससे फसलोत्पादन की गुणवत्ता कम हो जाती है। काजू के कीड़ों के प्राकृतिक दुश्मन क्रम. प्रतिरक्षक परपोषी (होस्ट) आक्रमण अवस्था 1 फ्लावर बग (एंथो कोराइड्स ) थ्रीप्स, एफिड्स, माइट्स वयस्क, नवविकसित, अंडा छोटे लार्वा 2 शील्ड बग बग्स, लेपीडॉप्टेरा अविकसित एवं वयस्क अवस्था 3 लेडी बर्ड बीटिल एफिड, मिली बग, जैसिड, थ्रीप्स, लेपीडॉप्टेरा निम्फ तथा वयस्क 4 ग्राउड बीटिल मुलायम शरीर के कीड़े लार्वा एवं वयस्क 5 प्रेयींग मैनटीडस सभी प्रकार के कीड़े सभी अवस्था 6 होभर फ्लाई एफिड्स सभी अवस्था 7 चीटियाँ मुलायम शरीर के कीड़े अंडा एवं लार्वा अवस्था 8 प्रीडेटरी लेपीडॉप्टेरा अंडा अवस्था 9 ईयर विग्स लेपीडॉप्टेरा लार्वा अवस्था 10 मकड़ी सभी प्रकार के कीड़े सबी अवस्था पर अधिकतर चलन अवस्था 11 ब्रैकीनाइड्स लेपीडॉप्टेरा कोलियोप्टेरा अविकसित अवस्था 12 डैमसेल [फ्लाई ड्रेगन फ्लाई सभी प्रकार के कीड़े नीम्फ, लार्वा, वयस्क 13 ट्राईकोग्रामाटिड्स लेपीडॉप्टेरा कोलियोप्टेरा अंडा 14 एन० पी० भी० लेपीडॉप्टेरा कोलियोप्टेरा लार्वा 15 ग्रीन मुसकरडाईन कवक लेपीडॉप्टेरा कोलियोप्टेरा जैसिड लार्वा कीटनाशक प्रयोग में सुरक्षा की सीमाएं क्र.सं. कीटनाशक का नाम कीटनाशक अधिनियम 1971 के अनुसार वर्गीकरण विषाक्तता त्रिभुज का रंग जोखिम के अनुसार डब्ल्यू एचओ वर्गीकरण प्रथम उपचार के उपाय विष प्रभाव के लक्षण विष प्रभाव के उपचार प्रतीक्षा अवधि (दिनों की सं.) 1 2 3 4 5 6 7 8 9 कीटनाशक – आर्गनोफॉस्फोट कीटनाशक 1 इंडोसल्फान अत्यंत विषैला पीला श्रेणी 2 माध्यम नुकसानदेह प्रभावित व्यक्ति प्रदूषित क्षेत्र सेअलग हटा दें। (क) चमड़ी से सम्पर्क स्थिति में प्रदूषित कपड़े को जल्द उतार दें और साबुन तथा अधिक पानी से धो दें। (ख) आँख में प्रदुषण आँख को साफ एवं ठंडे पानी से अनुकों बार आंख को धोंएं। (ग) श्वास संसर्ग व्यक्ति को खुली हवा में रखे, गला और छाती के आस- पास के कपड़े ढीले कर दें। (घ) खाना संसर्ग – अगर व्यक्ति होश में है तो गले में ऊँगली डालकर उल्टी कराएं/ दूध, शराब एवं चर्बी वाले पदार्थ न दें। यदि व्यक्ति बेहोश है तो ध्यान दें कि उसकी श्वसन प्रणाली साफ एवं बिना किसी रुकावट के हो व्यक्ति के सिर थोड़ा नीचा रखकर चेहरे को एक किनारे घुमा दें सांस लेने में कष्ट हो तो मुख से या नाक सांस दें। चिकित्सीय सहायता पीड़ित को तुरंत कीटनाशक के डब्बे, लेबल के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। उल्टी, बैचैनी, मिचली बेहोशी, तेज धड़कन श्वास-क्रिया में ह्रास तथा मृत्यु - 2-4 लीटर नल के जल से पेट का प्रक्षालन करे 130 ग्राम सोडियम सल्फेट को एक कप पानी में मिलाकर कैथारसीस करावें। -बेचैनी एवं धड़कन को कम करने हेतु बार्बिच्युरेट्स की उपयुक्त मात्रा लगातार दें। -श्वसनक्रिया का नजदीक से ध्यान रखें। अगर आवश्यक हो तो कृत्रिम श्वास देने की व्यवस्था करें। -तेल, तेलिय पदार्थ, तेलीय दस्तकारक एडरनालीन का प्रयोग न करे। -उत्तेजकपदार्थ का प्रयोग न करें। -प्रत्येक चार घंटों पर इंट्राभेनस कैल्सियम ग्लूकोनेट (10%-10 मिली०-एम्पुल) दें। आर्गेनोफस्फेट कीटनाशक 2 3. क्वीनॉल फॉस फौसफामीनडॉन अत्यधिक जहरीला अत्यधिक जहरीला पीला चमकीला लाल श्रेणी 2 सामान्य जोखिम भरा श्रेणी 1 अत्यंत नुकसानदेह हल्का-भूख न लगना, सरदर्द चक्कर आना, कमजोरी, बेचैनी जुबान लड़खड़ाना एवं पलकें कांपना, अल्पदृष्टि, देखने में कष्ट होना। सामान्य- मितली, लार बहना आंसू बहना, पेट में मरोड़, उल्टी पसीना आना, नाड़ी की गति धीमी मांसपेशियाँ कांपना, अल्पदृष्टि तीव्र- दस्त, पलको की कोई प्रतिक्रिया नहीं बिलकुल स्थिर, सांस लेने में तकलीफ फेफड़ा फूलना, रंग नीला पड़ना, अवरोध नियन्त्रण में कमी, मूर्च्छा, बेहोशी एवं हृदय अवरुद्ध होना। -ओ०पी० के विष के अत्यधिक प्रभाव दिखने पर एट्रोपिन इंजेक्शन (वयस्कों के लिए 2-4 मि०ग्राम) बच्चों के लिए 0.5-10 मि०ग्राम) की अनुशंसा की जाती है। 5-10 मिनट के अंतराल पर उपरोक्त को दुहरावें जब तक कि दवा का असर न दिखें शीघ्रता शीघ्रता अति आवश्यक एंट्रोपीन इंजेक्शन 1-4 मि.ग्रा. 1 जब विष के लक्षण पुनः दिखाई दे तो 2 मि.ग्रा. दोबारा दें। ( 15-16 मिनट अंतराल) अत्यधिक लार बहना अच्छा संकेत और एट्रोपीन की आवश्यकता है। -हवा आने के रास्ते खुले रखें, चूसें, ऑक्सीजन प्रयोग करें, इंडोट्रैकियल टूयूब डालें । टैकियोटॉमी करें और आवश्यकतानुसार कृत्रिम सांस दें। -मुंह में विष चले जाने की दशा में यदि यदि उल्टी न हो रही तो 5% सोडियम बाईकार्बोनेट से पेट का प्रक्षालन करें, , चमड़ी में सम्पर्क के लिए साबुन और पानी से धोएं ( आँख नमक पानी से धोएं) सम्पर्क में आए स्थानों में धोते समय रबर के दस्ताने पहन लें। एट्रोपिन के अलावा 2-पीएएम (2- पाईरिडीन एल्डोक्जाएम मेथीओडाटाड दें। 1 ग्रा. एवं शिशुओं के लिए 0.25 ग्रा. इंट्राविनस धीमीगति में 5 मिनट की अवधि में और निर्देश के अनुसार समय-समय पर इसका दुहराव करें एक से अधिक इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है। मोरफिन, थियोफायलिन एमीनोफायलीन बारबीचुरेट्स देने से बचें, फेनेथायाजीन दें। -नीला पड़ गये रोगी को एट्रोपीन न दें। पहले कृत्रिम सांस दें फिर एट्रोपिन दें। कार्बामेट्स 4 कार्बाराइल उच्च रूप से विषैला पीला श्रेणी 2 सामान्य नुकसान पुतलियों का संकुचन, लार निकलना, जोर से पसीना अवसाद, मांसपेशियों में तालमेल न होना मतली उल्टी, दस्त, पेडू में दर्द छाती में में कड़ापन 1-4 एम० जी० एट्रोपीन इंजेक्शन जब विष के लक्षण दुबारा दिखें तो 2 फिर से दुहरावें एम जी (15-60 मिनट अंतराल पर) अधिक लार निकलना अच्छा चिन्ह, एट्रोपीन की और आवश्यकता है। हवा आनेवाले मार्ग खुलें रखें, प्रश्वास की क्रिया करें। , ऑक्सीजन प्रयोग करें इंट्रोटैकियल टूयूब डालें ट्रैकियोटॉमी करें और आवश्यकतानुसार कृत्रिम सांस दें। यदि उल्टी न आती हो तो 5% सोडियम बाईकार्बोनेट से पेट प्रक्षालन करें, चमड़ी में सम्पर्क के लिए साबुन और पानी से धोएं ( आँख नमक पानी से धोएं) सम्पर्क में आए स्थानों में धोते समय रबर के दस्ताने पहन लें। -ऑक्सीजन - मॉरफीन यदि आवश्यक हो। -थियोफायलीन एवं एमीनोफायलीन तथा बार्बोच्युरेट्स से बचें। पीएएम एवं अन्यऑक्सीजाईम हानिकारक नहीं है, वास्तव में रूटीन इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं नीले पड़ गये रोगी को एट्रोपिन न दें। पहले कृत्रिम श्वास दे फिर इसके बाद एट्रोपिन दें। कवकनाशक 5 कॉपर आक्सीक्लोराइड मैनकोजेब सेविडोल कम जहरीला नीला हरा श्रेणी 3 कम जोखिम सामान्य उपयोग में अल्प नुकसानदेह सिरदर्द .तेज, धड़कन उल्टी, चेहरा लाल होना। नाक, गला, आंख और चमड़ी में खुजली कोई विशिष्ट प्रतिकारक नहीं। चिकित्सा अनिवार्य रूप से लक्षण पर निर्भर है। कीटनाशक उपयोग के लिए मौलिक सावधानियाँ कीटनाशक क्रय एक बार प्रयोग के लिए जितनी मात्रा की आवश्यकता है उतनी ही मात्रा में कीटनाशक का क्रय करें, जैसे-100,250, 500 या 1000 ग्राम/ मिली० रिसते हुए डिब्बों, खुला, बिना मोहर, फटे बैग में कीटनाशक का क्रय न करें। बिना अनुमोदित लेबल वाले कीटनाशक का चयन न करें। भण्डारण घर के अंदर कीटनाशक का भण्डारण न करें। मौलिक मोहरबंद डब्बे का ही प्रयोग करें। कीटनाशक को किसी दुसरे पात्र में स्थानांतरित न करें। खाद्य सामग्री या चारा के साथ कीटनाशक को न रखें। कीटनाशक को बच्चों या पशुओं के पहुँच के बाहर रखे। वर्षा या धुप में कीटनाशक के साथ न रखें। हस्तलन खाद्य पदार्थों के साथ कीटनाशक को न लावें तथा परिवहन न करें। अधिक कीटनाशक की मात्रा को सर पर, कंधों पर , पीठ पर रखकर स्थानांतरित न करें। छिड़काव हेतु घोल निर्माण में सावधानियाँ केवल शुद्ध जल का प्रयोग करें। निर्माण अवधि में अपना नाक, आँख, मुंह, कान तथा हाथ का बचाव करें। घोल निर्माण करते समय हाथ का दस्ताना, चेहरे का मुखौटा, नकाब तथा सर को ढकते हुए टोपी का प्रयोग करें। इस अवधि में कीटनाशक हेतु उपयोग किये गये पॉलिथीन का उपर्युक्त कार्य हेतु इस्तेमाल न करें। घोल निर्माण करते समय डिब्बे पर अंकित सावधानियाँ को पढ़कर अच्छी प्रकार समझ लें, तदनुसार कार्रवाई करें। छिड़काव किये जाने वाली मात्रा में ही घोल का निर्माण करें। दानेदार कीटनाशक को जल के साथ मिश्रण न बनावें। मोहरबंद पात्र के सान्द्र कीटनाशक को हाथ के सम्पर्क में न आने दें। छिड़काव मशीन के टैंक को न सूंघें। छिड़काव मशीन के टैंक में कीटनाशक ढालते समय बाहर न गिरने दें। छिड़काव मिश्रण तैयार करते समय खाना, पीना, चबाना, या धूम्रपान करना मना है। उपकरण सही प्रकार के उपकरण का ही चयन करें। रिसनेवाले या दोषपूर्ण उपकरण का प्रयोग न करें। उचित प्रकार को नोजल का ही प्रयोग न करें। रुकावट पैदा होने और नोजल को मुंह से न फूंकें तथा साफ करें। इस कार्य टूथ-ब्रश एवं स्वच्छजल का ही प्रयोग करें। अपतृण/खरपतवार नाशक तथा कीट प्रयोग हेतु एक ही छिड़काव मशीन का उपयोग न करें। कीटनाशक छिड़काव हेतु सावधानियाँ केवल सिफारिश की गयी मात्रा तथा सांद्रता के घोल का ही प्रयोग करें। कीटनाशक का छिड़काव गर्म टिन की अवधि एवं तेज वायु गति के समय न करें। वर्षोपरांत या वर्षा के पूर्व (अनुमानित) कीटनाशक का छिड़काव न करें। वायुगति दिशा के विरुद्ध कीटनाशक का छिड़काव न करें। इमलसीफियवुल कासंट्रेट फार्मुलेशन का प्रयोग बैटरी चालित यू एल भी स्प्रेयर से न करें। छिड़काव के पश्चात स्प्रेयर, बाल्टी आदि को साबुन पानी से साफ कर लें। बाल्टी या अन्य पात्र जिसका उपयोग छिड़काव में किया गया है, उसका घरेलू कार्य हेतु पुनः उपयोग न करें। छिड़काव के तुरंत बाद उपचारित क्षेत्र में जानवर या मजदूर का प्रवेश वर्जित कर दें। निपटान बचे हुए छिड़काव घोल को तालाब, जलाशय या पानी के पाइप के सम्पर्क में न आने दें। उपयोग किये गये बर्तन, डब्बे को पत्थर से पिचकाकर जल स्रोत से दूर मिट्टी में काफी गहराई में गाड़ दें। खाली डब्बे का उपयोग खाद्य भंडारण हेतु न करें। स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखण्ड सरकार